कल शनिवार सुबह 04:17 बजे से शुरू हो जायेंगे पंचक- बांस से बनी वस्तुओं का प्रयोग वर्जित- 5 दिनों तक कावड़ नहीं ले जा पायेंगे कावड़िये

कल शनिवार सुबह 04:17 बजे से शुरू हो जायेंगे पंचक- बांस से बनी वस्तुओं का प्रयोग वर्जित- 5 दिनों तक कावड़ नहीं ले जा पायेंगे कावड़िये

रिपोर्ट- हरिद्वार ब्यूरो
हरिद्वार-(उत्तराखंड)- धर्म नगरी हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों व पंडितों के अनुसार हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में पांच ऐसे दिन आते हैं जिनका अलग ही महत्व होता है इन्हे ही पंचक कहते है। मान्यता के अनुसार पंचक में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है प्रत्येक माह का पंचक अलग अलग होता है तो किसी माह में शुभ कार्य नहीं किया जाता है तो किसी माह में शुभ कार्य किया जाता है।


आओ जानते हैं पंचक क्या है:- हरिद्वार तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है।
इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है। अर्थात पंचक के अंतर्गत धनिष्ठा,शतभिषा,उत्तरा भाद्रपद,पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को ‘पंचक’ कहा जाता है।
अगर आधुनिक खगोल विज्ञान की दृष्टि से देखें तो 360 अंशों वाले भचक्र में पृथ्वी जब 300 अंश से 360 अंश के मध्य भ्रमण कर रही होती है तो उस अवधि में धरती पर चन्द्रमा का प्रभाव अत्यधिक होता है। इस अवधि को पंचक काल कहते है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचकों में काष्ठ खरीदना निषिद्ध है, काष्ठ की होने के कारण कुछ लोग इसमें कांवड़ उठाना निषिद्ध बताते हैं। इसलिए पंचको में हरिद्वार में कावडियो के आने में कमी हो जाती है।
यदि पंचक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो तो हनुमान मंदिर में फल चढ़ाकर यात्रा प्रारंभ कर सकते हैं। ऐसा करने से पंचक दोष दूर हो जाता है।

क्योंकि पंचक काल में बांस से बनी वस्तुओं को खरीदना निषेध माना गया है साथ ही दक्षिण दिशा में यात्रा करने से भी शिवभक्त परहेज करते हैं इसी कारण पंचक लगते ही हरिद्वार में कावड़ यात्रियों के आने जाने में कमी हो जाती है।
इस बार पंचक:- 16-07-2022 शनिवार सुबह 04:17 am पर शुरू होकर 20- 07- 2022 बुधवार दोपहर 12:51 मिनट पर समाप्त होगे पंचक में शिवभक्तों के हरिद्वार आने का क्रम जारी रहेगा लेकिन वापसी में इसका असर पड़ेगा।
हरिद्वार से नई कावड़ लेकर जाने वाले शिवभक्त पंचक समाप्ति के बाद ही नई कावड़ लेकर हरिद्वार से रवाना होंगे। चूंकि लगभग इस पूरी कांवड यात्रा का रुख दक्षिण दिशा की ओर रहती है और सनातन शास्त्रों के अनुसार पंचक होने पर दक्षिण दिशा की यात्रा नही करनी चाहिये अधिकतर कांवड यात्रा हरिद्वार में उत्तर दिशा से प्रारंभ होकर दक्षिण दिशा मुजफ्फरनगर,मेरठ,बागपत, हरियाणा,दिल्ली व राजस्थान की ओर जाती है।

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