आशाओं में निराशा- मांगे नही मानी तो 2 अगस्त से करेंगी कार्य बहिष्कार

आशाओं में निराशा- मांगे नही मानी तो 2 अगस्त से करेंगी कार्य बहिष्कार

रिपोर्ट- नैनीताल
नैनीताल- लंबे समय से अपनी मांगों को मनवाने के लिए सूबे की आशाएं सरकार के खिलाफ लगातार सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रहीं हैं।
उत्तराखंड में आज आशाओं ने जिला मुख्यालयों पर एकजुट होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करी और विरोध के स्वर मुखर किए।

नैनीताल में भी आशाओं ने तल्लीताल गांधी चौक पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुवे प्रदर्शन किया और अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन प्रेषित किया।
इस दौरान आशा कार्यकत्रियों ने चेतावनी देते हुवे कहा कि अगर सरकार ने आगामी 1 अगस्त तक उनकी मांगों पर विचार नही किया या किसी तरह की अनदेखी करी तो पूरे प्रदेश की आशाएं 2 अगस्त से कार्य बहिष्कार कर आंदोलन की राह पकड़ लेंगी जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
आशा कार्यकत्रियों की मांगे:-
1- आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम 21 हजार वेतन लागू किया जाय।
2- जब तक मासिक वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता तब तक आशाओं को भी आंगनबाड़ी जैसी अन्य स्कीम वर्कर्स की तरह मासिक मानदेय फिक्स किया जाय।
3- सभी आशाओं को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन का प्रावधान किया जाय और जिन आशाओं की पैदल ड्यूटी करते करते घुटनों में दिक्कतें आ गई हैं उनके लिए एक मुश्त पैकेज की घोषणा की जाय।
4- पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा घोषित कोरोना भत्ता तत्काल आशाओं के खाते में डाला जाय और कोविड कार्य में लगी सभी आशा वर्करों कोरोना ड्यूटी की शुरुआत से 10 हजार रू० मासिक कोरोना-भत्ता भुगतान किया जाय।

5- कोविड कार्य में लगी आशाओं वर्करों की 50 लाख का जीवन बीमा और 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा लागू किया जाय ।
6- कोरोना ड्यूटी के क्रम में मृत आशा वर्करों के आश्रितों को 50 लाख का बीमा और 4 लाख का अनुग्रह अनुदान भुगतान किया जाय. उड़ीसा की तरह ऐसे मृत कर्मियों के आश्रित को विशेष मासिक भुगतान किया जाय।
7- सेवा(ड्यूटी) के समय दुर्घटना, हार्ट अटैक या बीमारी होने की स्थिति में आशाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए नियम बनाया जाय और न्यूनतम दस लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान किया जाय।
8- देय मासिक राशि और सभी मदों का बकाया सहित समय से भुगतान किया जाय।
9- आशाओं के विविध भुगतानों में नीचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी पर लगाम लगायी जाय।
10- सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति तत्काल की जाय।


11- आशाओं के साथ अस्पतालों में सम्मानजनक व्यवहार किया जाय।
12- जब तक कोरोना ड्यूटी के लिए अलग से मासिक भत्ते का प्रावधान नहीं किया जाता तब तक आशाओं की कोरोना ड्यूटी न लगायी जाय।

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