सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभा रही अल्मोड़ा की बेटी दीक्षा- परम्परा को धागों में पिरोकर बना रही हैं राखियां- राखियों में नजर आ रही समृद्ध ऐपण कला

सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभा रही अल्मोड़ा की बेटी दीक्षा- परम्परा को धागों में पिरोकर बना रही हैं राखियां- राखियों में नजर आ रही समृद्ध ऐपण कला

रिपोर्ट- अल्मोड़ा ब्यूरो
अल्मोड़ा-(उत्तराखंड)- किसी ने सच ही कहा है कि “जरूरी नहीं रोशनी चिरागों से हो,बेटियां भी घर में उजाला करती हैं।
अल्मोड़ा की बेटी दीक्षा अपने हुनर से अपना घर तो रोशन कर ही रही है साथ ही अपने राज्य का भी नाम रोशन कर रही है।

दरअसल दीक्षा उपाध्याय उत्तराखंड की समृद्ध परम्परा ऐपण को धागों में पिरोकर राखियां बना रही हैं।
मूलरूप अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर में रहने वाली दीक्षा बचपन से परम्पराओं से जुड़ी रही हर मांगलिक कार्य में घर में इस समृद्ध परम्परा को देखती आई है अपनी माँ को गुरु मानने वाली दीक्षा कहती हैं करीब 2 वर्ष पहले लॉकडाउन के दौरान सोचा क्यों ना अपने हुनर को रोजगार से जोड़ा जाये अपनी सोच को परिवार के सहयोग से साकार किया और ऐपण को कलाकृतियों में ढालना शुरु कर दिया।

इन दिनों दीक्षा सुंदर ऐपण कला को धागों में पिरोकर राखियां बना रही हैं इन परम्परागत हस्तनिर्मित राखियों के लिये दीक्षा के पास उत्तराखंड के अलावा देशभर से डिमांड आ रही है।

दीक्षा ने अपने हुनर से न केवल अपने लिये रोजगार के द्वार खोले बल्कि वो यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने व ऐपण कला को पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

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