
रिपोर्ट- नैनीताल
नैनीताल- भारत के सबसे महंगे मशरूमों में से एक मोरेल (गुच्छी) मशरूम जल्द पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में रोजगार की कमी से होने वाले पलायन को रोकने में काफी हद तक सहायक सिद्ध हो सकती है।
कीमती और औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी मशरूम उगाने की तकनीक को पहाड़ के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ले जाने की योजना बनाई जा रही है जिससे कि पहाड़ मशरूम की खेती कर आर्थिक रुप से और अधिक मजबूत बन सकें।

1965 से मशरूम के क्षेत्र में काम कर रहे पदमश्री अनूप साह ने बताया कि उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ मिलकर पहली बार मोरेल (गुच्छी) मशरूम को नैनीताल जिले के फतेहपुर इलाके में सफलतापूर्वक वैज्ञानिक तकनीक और संतुलित वातावरण में उगाया है जिसके सार्थक परिणाम भी सामने आये हैं।
अनूप साह ने बताया गुच्छी मशरूम हिमालयी क्षेत्रों में 5000 से 10000 फीट की ऊंचाई पर पाया जाता है जिनमे से उत्तराखंड भी एक है।

साह ने कहा कि वो अपनी टीम के साथ जल्द हर ग्रामीण तक इसकी उत्पादन तकनीक और बीज को पहुंचाने का काम करेंगे जिससे लोग अपनी पारिवारिक आय में वृद्धि कर सकें।
उन्होंने कहा राज्य का युवा शिक्षित है और हर नई तकनीक को जानता समझता है इसलिये उनकी कोशिश रहेगी कि इस काम में अधिक से अधिक युवाओं को जोड़कर लाभान्वित किया जा सके।


