
रिपोर्ट- नैनीताल
नैनीताल- समृद्ध पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजता कथक नृत्य आज देवताओं,मंदिरों, राजा महाराजाओं के दरबार से निकलकर बड़े बड़े मंचों तक अपनी धमक दे रहा है जिसमें लोग कला,संस्कृति और अनुशासन के साथ तालमेल बनाकर रुचि दिखा रहे हैं और कई ऐसे हैं जिन्होंने कथक नृत्य को आत्मसाद कर इसमें अपने आप को समर्पित कर दिया है।
उन्हीं में से एक हैं 35 वर्षीय युवा कथक नर्तक आशीष सिंह जो कि मूलरुप से वाराणसी के हैं जो वृंदावन में पिछले कई सालों से नृत्य साधना कर रहे हैं।

बचपन से कथक नृत्य(शास्त्रीय नृत्य) में रुचि और प्राचीन वैदिक काल की समृद्ध कला को जानने व समझने का जुनून ऐसा कि इतनी कम उम्र में उन्होंने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में जाकर कथक नृत्य के जरिये कई गौरवशाली पुरस्कार अपने नाम किये अब वो इस कला को पूरे समर्पण भाव से उत्तराखंड के दूर दराज इलाकों के युवाओं को कथक नृत्य शैली के गुर सिखाना चाहते हैं।
कथक नर्तक आशीष सुंदर हस्त मुद्राओं,व्यापक कदमों, लचीली शारीरिक गतिविधियों और सबसे खास गहन चेहरे के भावों के माध्यम से सुंदर कहानियों को प्रदर्शित कर सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर देते हैं।
आशीष कहते हैं कि आज समाज में नशा तेजी से फैल रहा है इसकी जद में सबसे अधिक युवा वर्ग आ रहा है जो हम सबके लिए अच्छे संकेत नहीं है इसलिये जरूरी है कि कथक नृत्य से युवाओं को जोड़ा जाए जो उन्हें एक सकारात्मक दिशा देने में प्रभावशाली और रचनात्मक जरिया साबित हो सकता है।







