विशेष:- आजादी से पहले की मिठास आज भी लोगों की जुबां पर बरकरार

विशेष:- आजादी से पहले की मिठास आज भी लोगों की जुबां पर बरकरार

रिपोर्ट- नैनीताल
नैनीताल- भले ही समाज आधुनिकीकरण के दौर में है लेकिन आज भी हम परम्पराओं से जुड़े हैं कुछ चीजें वक्त के साँथ और बलवती हो गई हैं आज भी हम कुछ चीजों में अपने पूर्वजों के पदचिन्हों पर हैं उन्हीं में से एक है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले मुंह मीठा करना हम आज भी कहते हैं “कुछ मीठा हो जाये” ऐसे ही नगीना के तुलाराम के रसगुल्ले सैकड़ों वर्षों से लोगों की जुबां में मिठास घोल रहे हैं।

आजादी से पहले 1945 में तुलाराम गुप्ता ने गुलामी की कड़वाहट के बीच नगीना में “रसगुल्ले” बनाने शुरु किये एक छोटी सी शुरुआत कर तुलाराम ने उस विषम परिस्थितियों में रस रसगुल्ले बनाना शुरु किया उनके हाथों में वो जादू था जिसने नगीना के रसगुल्लों को पूरे देश में प्रसिद्ध कर दिया उनकी इस विरासत को उनके वंशजों ने बखूबी संभाला और आज तुलाराम के रसगुल्लों का स्वाद हर जुबां पर है।


आप सोचेंगे रसगुल्ले तो सब जगह मिलते हैं लेकिन अगर आप एक बार तुलाराम के रसगुल्ले खा लेंगे तो आपकी राय बदल जायेगी हर दिन हजारों लोग न केवल यहाँ के रसगुल्लों का आनन्द लेते हैं बल्कि यहाँ की मिठास अपने घर भी ले जाते हैं।
तुलाराम के पौत्र रोहित गुप्ता बताते हैं कि उनके यहाँ देश के हर कोने से रसगुल्लों का आनन्द लेने लोग आते हैं हर वर्ग हर समुदाय के लोगों की जुबां पर ये घोलते हैं बस मिठास।

अगर आपने अब तक तुलाराम के रसगुल्लों का स्वाद नहीं चखा तो एक बार नगीना जरूर आईए यकीन मानिये यहाँ के रसगुल्ले खाने के बाद इसकी मिठास कभी भुला नहीं पायेंगे।।।

उत्तराखंड