12 साल बाद यात्रा पर निकले दानवीर कर्ण

12 साल बाद यात्रा पर निकले दानवीर कर्ण

रिपोर्ट- आशीष मिश्रा उत्तरकाशी
उत्तरकाशी-(उत्तराखंड)- उत्तरकाशी जिले के मोरी तहसील सिंगतूर पट्टी के 25 गांवों के आराध्य देव दानवीर कर्ण महाराज,गुरुमाता रेणुका, कर्ण महाराज के सारथी शल्य महाराज व कर्ण महाराज के पुत्र वृष केतु महाराज पुनः18 वर्षो के बाद केदारनाथ कि यात्रा पर निकले हैं।
यात्रा आज 23 मई 2022 से प्रारंभ हो गई है इस यात्रा में दानवीर कर्ण को मानने वाले ब्राह्मण,पुजारी,बजीर,कंडी वाहक,ठानी,और उनके बाजगी लोग प्रतिभाग कर रहे हैं।
उत्तरकाशी में बड़े-बड़े ऋषि मुनियों ने तपस्या की है चाहे मां गंगा की अवतरित कथा हो या मां यमुना की उत्तरकाशी जिला देव कथाओं और धर्म के लिए पूरे विश्व मे जाना जाता है।

ऐसे ही एक हैं दानवीर कर्ण, वैसे तो महाभारत में दानवीर कर्ण और उनकी दानवीरता जग जाहिर है लेकिन उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक में दानवीर कर्ण की पूजा होती है मोरी प्रखंड के 24 गांव ऐसे हैं जहां दानवीर कर्ण को अपना आराध्य देव मानकर उनको पूजा जाता है।
उत्तरकाशी से करीब 165 किलोमीटर दूर सीमांत मोरी प्रखंड है मोरी प्रखंड के संगतूर पट्टी का मुख्य केंद्र है नैटवाड़, नैटवाड़ 24 गांवों का केंद्र है इन्हीं 25 गांवों में एक गांव है देवरा।
देवरा गांव में दानवीर कर्ण का दिव्य और भव्य मंदिर है जिसकी सुंदरता और दिव्यता देखते ही बनती है यहां के लोकगीतों और लोक नृत्यों में महाभारत में दानवीर कर्ण की कहानियां होती है।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यहां के लोग कर्ण को इतना मानते हैं कि इस क्षेत्र में सभी मंदिर दानवीर कर्ण के ही है साथ ही आस पास के गांवों में कर्ण के सारथी शल्य महाराज,कर्ण के गण पोखू देवता,कर्ण की गुरुमाता रेणुका देवी के भी मंदिर हैं।
दानवीर कर्ण भगवान शिव को अपना गुरु मानते थे जिनसे मिलने वो हर 12 साल बाद केदारनाथ जाते हैं।

एक महीने की इस पैदल यात्रा में कर्ण के पुजारी,मंदिर समिति के लोग व ग्रामीणों सहित 40 से 45 लोग शामिल होते हैं जो देवरा गांव से चलकर बड़कोट पहुचेगे जहां मां यमुना का आशिर्वाद लेकर उत्तरकाशी पहुंचेंगे यहां मां गंगा का आशिर्वाद लेकर सड़क मार्ग से पैदल यात्रा कर केदारनाथ धाम पहुंचेंगे।
यात्रा में करीब एक महीने का समय लगता है ये यात्रा करीब 350 किलोमीटर की है जिसमें महाराज कर्ण की कंडी उठाने वाले नंगे पैर चलते हैं इस यात्रा में साधु संत,निर्धन कोई कुछ भी मांग ले तो दानवीर कर्ण दान करते हैं साथ ही केदारनाथ पहुंचकर कर्ण के द्वारा सोने चांदी का गुप्त दान किया जाता है।
यात्रा में दानवीर कर्ण महाराज के अमर पुत्र वृष केतु( विषासन) महाराज भी ग्रामीणों के साँथ शामिल होते हैं।

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