नवरात्रि विशेष:- हिन्दू नव संवत्सर पर जानिए अपने ग्रहों की दशा एवं उपाय

नवरात्रि विशेष:- हिन्दू नव संवत्सर पर जानिए अपने ग्रहों की दशा एवं उपाय

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रिपोर्ट- नैनीताल
नैनीताल- संवत् 2083
शाके1948आपको हिन्दू नव संवत्सर चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं! यह नया वर्ष आपके जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए। माँ भगवती की कृपा से आपके सभी संकल्प सिद्ध हों और घर में सुख-शांति व उमंग का वास हो।
रौद्र सम्वत्सर में राजाओं (राजनेताओं / शासकों) में परस्पर मतभेद एवं क्षोभ बना रहे। राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते देश को हानि पहुंचाने से भी कोई गुरेज नहीं करेगा। अन्न तथा जल का अभाव बना रहेगा। पृथ्वी में रोगों से मनुष्य त्रस्त चौपायों में कष्ट, शासन में उलटफेर की स्थिति तथा वर्षा में कमी होगी। चैत्रादि तीन मासों महंगाई, आषाढ़ एवं श्रावण में अल्प वर्षा तथा खण्डवृष्टि, भाद्रपद मास में अधिक वर्षा, अन्न समता, मसालों में तेजी, जनजीवन सुखी तथा चतुष्पदों में कष्ट होगा।

अन्य मतानुसार सम्पूर्ण धरा में उत्पात एवं वर्षा में कमी, जगत में हाहाकार से जनजीवन को कष्ट, धनधान्य की कमी तथा चोरी और तस्करी चरम पर।

इस वर्ष राजा गुरु हैं, जिनके पास सस्येश, निरसेश (सूखे फल तथा मेवा) और धनेश विभाग हैं, एवं मन्त्री भौम हैं। धान्येश बुध हैं, मेघेश (वर्षा प्रबन्धन), फलेश (उद्यान एवं फल-विभाग) तथा दुर्गेश (रक्षा विभाग) चन्द्र, एवं रसेश (रस-पदार्थ) शनि के पास है।

दस में से आठ विभाग शुभ ग्रहों के आधीन होने से अशुभफलों में न्यूनता। गोरस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो, विप्र वर्ग यज्ञादि कर्म करके अच्छा धनार्जन करें तथा धार्मिक कार्यों में लोगों की रुचि बढ़े। दक्षिण और पश्चिमी क्षेत्रों में वर्षा कम, चौपायों में रोग एवं कष्ट । फल-फूल की अधिकता, व्यापार में लाभ, नये नये प्रकार के व्यवसाय प्रभावी होंगे। वर्ष एवं वर्षेश लग्नानुसार देश में प्रगतिकारी योजनाओं का क्रियान्वयन होगा। जनजीवन सुखद होगा। सीमाओं पर युद्ध। स्थितियां प्रतिकूल रहने के बाद भी उद्योगों में वृद्धि। भारत शीर्षस्थ स्थान पर रहते हुए व्यापार एवं आर्थिक क्षेत्रों में प्रगतिशील रहेगा। पूर्वोत्तर तथा दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में स्थिति चिन्तनीय। वर्ष के पहले,छठे तथा बारहवें मास कष्टकारी शेष वर्ष शुभ फलप्रद होगा।

मेषः राशिवालों को शनि की साढेसाती प्रभावित करेगी। सिंह के गुरु लाभ प्रदान करेंगे। कार्यक्षेत्र में स्थानान्तरण के योग हैं। चोट तथा दर्घटनाओं से सावधानी बरते आषाढ़, आश्विन तथा फाल्गुन मासों में महत्वपूर्ण कार्य सिद्ध करें। गुरु, शनि, राहु और केतु का जपदान तथा शिवाराधना करने से अशुभ फलों में न्यूनता ।

वृषः- राशिवालों का वर्ष सामान्य फलदायक होगा। आर्थिक लाभ प्रायः वर्षभर बना रहेगा. यद्यपि पहले तिमाही के बाद धन प्रवाह में कुछ रुकावटें भी आयेंगी। कार्यों में गलत मार्गदर्शन मिलने के अवसर भी आयेंगे, अतः सावधानी आपेक्षित है। वर्ष के अंतिम तिमाही में सन्तान की तरफ से अच्छे समाचार मिलेंगे। श्रावण, कार्तिक तथा चैत्र मास शुभफलप्रद रहेंगे। अशुभ फलों में न्यूनता लाने के लिए गुरु एवं केतु का जपदान करना श्रेयष्कर रहे।

मिथुनः- राशिवालों का वर्ष सामान्य फलप्रद होगा। सम्बंधों को सही रखने के और अशान्ति से बचने लिए निरर्थक वाद-विवाद से बचें। धन के नये श्रोत उपजेंगे, परन्तु स्वास्थ्य इत्यादि में धन का व्यय होगा। वर्ष के अन्तिम तिमाही में सुख संसाधनों में कमी तथा धन का अपव्यय होगा। वैशाख, भाद्रपद एवं मार्गशीर्ष महत्वपूर्ण कार्य सिद्ध कर लें। गुरु, शनि, राहु तथा केतु का जपदान शुभ रहे।

कर्क:- राशिवालों का वर्ष मिलेजुले परिणाम देना वाला होगा। वर्ष का उत्तरार्ध विशेष रुप से ज्यादा फलदायक सिद्ध होगा। कार्य व्यवसाय में ज्यादा मेहनत करने पर ही यथोचित परिणाम मिलेंगे। स्वास्थ्य के प्रति विशेष सजग रहने की आवश्यकता है। रुके हुए कार्य में सिद्धि तथा धन की प्राप्ति के अवसर प्राप्त होंगे। ज्येष्ठ, आश्विन तथा पौषमास में महत्वपूर्ण कार्य सिद्ध करें। शिवार्चन तथा हनुमान जी की आराधना करने से अशुभ फलों में न्यूनता।

सिंहः राशिवालों का वर्ष शनि की दैया से प्रभावित रहेगा। वर्ष में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। गलत मार्गदर्शन से परेशानियां हो सकती हैं। तीर्थयात्रा एवं कार्यक्षेत्र में स्थानान्तरण शुभफलदायक होगा। नये मित्रों एवं बान्धवों से सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। आषाढ़, कार्तिक एवं माघ मास शुभफलप्रद। गुरु, शनि, राहु तथा केतु का जपदान करना श्रेयस्कर होगा।

कन्याः राशिवालों का यह वर्ष शुभफल प्रद है। प्रायः वर्षभर धन प्राप्ति के अवसर मिलेंगे परन्तु आलस्य का परित्याग करना अत्यन्त जरुरी है। विद्यार्थियों को कार्यक्षेत्र तथा दिशा का परिवर्तन करना हितकर रहेगा। कभी-कभी अनायास शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा के क्षणिक अवसर भी आयेंगे। श्रावण, मार्गशीर्ष तथा फाल्गुन मास शुभफलप्रद। अशुभ फल परिहारार्थ शनि का जपदान

और हनुमान जी की आराधना करना श्रेयस्कर रहेगा।

तुलाः राशिवालों का वर्ष मिश्रित फलप्रद होगा। यश, कार्यक्षेत्र, व्यवसाय तथा सम्मान में वृद्धि। वित्त लाभ एवं धनागम के नये श्रोत उत्पन्न होंगे। राजद्वार से यदा कदा भय एवं अपमान की स्थिति भी आयेगी। चैत्र, भाद्रपद तथा पौष मासों में अपने सभी महत्वपूर्ण कार्यों को सिद्ध करना चाहिये। गुरु एवं राहु का जपदान और हनुमान जी की आराधना करने से अशुभ फलों में न्यूनता आयेगी।

वृश्चिकः राशिवालों का वर्ष यश, सम्मान एवं आर्थिक क्षेत्रों में वृद्धि का होगा। वर्ष के तीसरे तिमाही में क्षणिक भय तथा वित्त नाश के अवसर आयेंगे। सन्तान की तरफ से विरोधी स्वर उठेंगे। वैशाख, आश्विन एवं माघ मासों में अपने महत्वपूर्ण कार्यों को सिद्ध करने का प्रयास करे।शनि और केतु का जपदान तथा हनुमानजी की आराधना शुभफलप्रद रहे।

धनुः- राशिवालों का वर्ष में शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा।

शत्रु बाधा, धन श्रोतों में अवरोध तथा प्रतिद्वन्दियों से अपमान प्रायः वर्षभर सहना पड़ सकता है। गुरु के सिंह राशि में संक्रमण होने पर यश, सम्मान और धन में वृद्धि के अवसर प्राप्त होंगे। चल अचल सम्पति में निवेश शुभ रहेगा। ज्येष्ठ, कार्तिक तथा फाल्गुन मासों में महत्पूर्ण कार्य सिद्ध होंगे। गुरू, शनि तथा केतु के जपदान तथा शिवार्चन करने से अशुभफलों का निराकरण सम्भव ।

मकरः- राशि वालों को लगभग सम्पूर्ण वर्ष धन सम्पदा एवं यश सम्मान का लाभ प्राप्त होगा। पिछले काफी समय से आ रहे अवरोध समाप्त होंगे। राहु-केतु के अशुभ परिणाम प्रायः वर्षभर प्रभावी रहेंगे। आषाढ़, मार्गशीर्ष और चैत्र मासों में अपने सभी महत्वपूर्ण कार्य सिद्ध करने का प्रयास करे। राहु-केतु के अशुभ परिणाम को कम करने के लिए ग्रहों के जपदान और हनुमान जी की आराधना करनी चाहिये।

कुम्भः- राशि वालों का वर्ष शनि की साढ़ेसाती से प्रभावित रहेगा। अपने ही घर के सदस्यों में आपसी मतभेदों के चलते दूरियां बढ़ेगी। आर्थिक, शारीरिक तथा मानसिक कष्ट प्रायः वर्षभर बना रहेगा। शेयर बाजार और जमीन जायदाद में निवेश करना अच्छा रहेगा। वैशाख, श्रावण तथा पौष मासों में महत्वपूर्ण कार्यों में सिद्धि प्राप्त होगी। गुरु, शनि तथा राहु के जपदान और शिवाराधना से अशुभफलों में न्यूनता।

मीनः- राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती वर्षभर प्रभावित करेगी। धन का अपव्यय बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन में दूरियां बढ़ेंगी। मानसिक तथा शारीरिक कष्ट। संतान से अच्छे समाचार सुनने को मिलेंगे। यश एवं सम्मान में न्यूनता। चल अचल सम्पति में निवेश करना अच्छा रहेगा। ज्येष्ठ, भाद्रपद तथा माघ मास शुभ रहें। शनि, राहु तथा केतु के जपदान एवं

शिवाराधना से अशुभ फलों के प्रभाव में न्यूनता।

निम्न प्रकार से रहेगा राशियों का आय व्यय वर्ष भर-
राशि आय व्यय फल
मेष 11 5 विजय
वृष 5 14 सुख
मिथुन 8 11 सुख
कर्क 2 11 रोग
सिंह 5 5 लाभ
कन्या। 8 11 सुख
तुला 5 14 सुख
वृश्चिक 11 5 विजय
धनु 14 11 हानि
मकर 2 8 लाभ
कुंभ। 2 8 लाभ
मीन 14 11 हानि

विषुवत्संक्रांति फल इस प्रकार से रहेगा –
इन नक्षत्र नाम और राशियों में विषुवत्संक्रान्ति सिर में गई है जो यश प्राप्ति कराती है
नक्षत्र – नाम राशि
ज्येष्ठा नो,या ,यि ,यू वृश्चिक
मूल ये,यो ,भा ,भी धनु
पूर्वाषाढा भू ,ध ,फ ,ढ धनु
उत्तराषाढा भे ,भो,जा,जी धनु/मकर
श्रवण खी ,खू ,खे ,खो मकर
धनिष्ठा गा ,गी,गू,गे मकर/कुम्भ
शतभिषा गो,सा ,सी, सू कुम्भ
उपाय -निरंतर हरिनाम स्मरण करते रहें 🙏

इन नक्षत्र नाम और राशियों में विषुवत्संक्रान्ति मुखमें गई है जो विद्या में उन्नति कराती है
नक्षत्र नाम राशि
स्वाति रू ,रे ,रो,ता तुला
विशाखा ती ,तू ,ते,तो तुला/वृश्चिक
अनुराधा ना ,नी,नू,ने वृश्चिक
उपाय -निरंतर हरि नाम स्मरण करते रहें🙏

इन नक्षत्र , नाम और राशियों में विषुवत्संक्रान्ति हृदय में गई है जो धन लाभ प्राप्त कराती है
नक्षत्र नाम राशि
मघा मा ,मी, मू,मे सिंह
पूर्वा फाल्गुनी मो ,टा,टी, टू सिंह
उत्तराफाल्गुनीटे,टो,पा,पी सिंह/कन्या
हस्त पू ,ष ,ण ,ठ कन्या
चित्रा पे,पो,रा ,री कन्या/तुला
उपाय -निरंतर हरि नाम स्मरण करते रहें🙏

इन नक्षत्र , नाम और राशियों में विषुवत्संक्रान्ति दाहिने हाथ में गई है जो दाम्पत्य सुख प्राप्त कराती है
नक्षत्र नाम राशि
पुनर्वसु के ,को ,हा ,ही मिथुन/कर्क
पुष्य हू ,हे ,हो ,डा कर्क
आश्लेषा डी,डू,डे,डो कर्क
उपाय -निरंतर हरि नाम स्मरण करते रहें 🙏

इन नक्षत्र , नाम और राशियों में विषुवत्संक्रान्ति बायें हाथ में गई है जो अर्थाभाव कराती है
नक्षत्र नाम राशि
रोहिणी ओ ,वा ,वी ,वू वृष
मृगशिरा वे ,वो ,का ,की वृष/मिथुन
आर्द्रा कु ,घ, ङ ,क्ष मिथुन
उपाय -पंडित जी से जानकारी प्राप्त कर यज्ञादि कर्म अपने घर में करें 🙏

इन नक्षत्र , नाम और राशियों में विषुवत्संक्रान्ति दाहिने पैर में में गई है जो निरर्थक भ्रमण कराती है
नक्षत्र नाम राशि
अश्विनी चू ,चे ,चो,ला मेष
भरुणी ली,लू,ले ,लो मेष
कृत्तिका अ,इ ,उ ,ए मेष/वृष
उपाय -पंडित जी से जानकारी प्राप्त कर यज्ञादि कर्म अपने घर में करें 🙏

इन नक्षत्र , नाम और राशियों में विषुवत्संक्रान्ति बायें पैर में गई है जो रोगादि कराती है
नक्षत्र नाम राशि
पूर्वाभाद्रपदा से,सो,दा, दी कुम्भ/मीन
उत्तराभाद्रपदा दू ,थ , झ,ञ मीन
रेवती दे , दो ,चा ,ची मीन
उपाय -14अप्रैल2026मंगलवार को वैशाखी पर्व के दिन पंडित जी को चांदी का बांया पैर,घी,चावल, दही सफेद वस्त्र, सफेद दाल, दक्षिणा दान करें 🙏

🙏संवत्सर अपैट- मेष, सिंह,धनु राशि को रहेगा
वैशाखी पर्व कर्क, वृश्चिक,मीन राशियों के लिए अपैट रहेगा
उपाय -पन्डित जी के द्वारा शिवालय मन्दिर में रूद्राभिषेक कराएं 🙏

🙏ग्रहण विवरण
इस संवत्सर में संपूर्ण पृथ्वी में तीन ग्रहण दृश्य होंगे, जिनमें से एक भी ग्रहण भारत में कहीं भी दृश्य नहीं होगा !अतः यहां पर इनका कोई भी सूतक प्रभाव नहीं होगा🙏

🙏विभिन्न राशियों में गोचर फल
मेष राशि
ग्रह फल
सूर्य अवनति
चंद्र अन्नलाभ
मंगल पीड़ा
बुध बन्धन भय
गुरु भय
शुक्र शत्रु नाश
शनि पीड़ा धन नाश
राहु कष्ट मान नाश
केतु रोग

वृष राशि
ग्रह फल
सूर्य हानि भय
चंद्र धनलाभ
मंगल धन नाश
बुध धन लाभ
गुरु धन लाभ
शुक्र सुख
शनि अर्थ हानि
राहु धन हानि
केतु वित्त नाश

मिथुन राशि
ग्रह फल
सूर्य द्रव्य प्राप्ति
चंद्र। श्री प्राप्ति
मंगल अर्थ लाभ
बुध रोग
गुरु रोग
शुक्र। सुख
शनि अर्थ लाभ
राहु महा सुख
केतु। सुख वृद्धि

कर्क राशि
ग्रह फल
सूर्य मान नाश
चंद्र कष्ट
मंगल शत्रु भय
बुध धन प्राप्ति
गुरु धन हानि
शुक्र धनागम
शनि शत्रु वृद्धि
राहु वैर नृप भय
केतु भय

सिंह राशि
ग्रह फल
सूर्य आर्थिक कष्ट
चंद्र कार्य नाश
मंगल रोगभय
बुध शोक
गुरु सुख
शुक्र पुत्र लाभ
शनि पुत्र -धन हानि
राहु शोक
केतु हानि

कन्या राशि
ग्रह फल
सूर्य शत्रु नाश
चंद्र। वित्त लाभ
मंगल सुख
बुध उन्नति
गुरु शोक रोग
शुक्र शत्रु वृद्धि
शनि वित्त स्थान लाभ
राहु लक्ष्मी प्राप्ति
केतु सुख

तुला राशि
ग्रह फल
सूर्य गमन अर्थ हानि
चंद्रमा सुख
मंगल रोग
बुध विग्रह रोग
गुरु सम्मान
शुक्र भय
शनि दोष रोग
राहु कलह
केतु दुर्गति

वृश्चिक राशि
ग्रह फल
सूर्य रोग
चंद्र क्लेश मृत्यु
मंगल शत्रु बाधा
बुध धन वृद्धि
गुरु पीड़ा धन हानि
शुक्र धन लाभ
शनि शत्रु रोग वृद्धि
राहु रोग भय
केतु हानि

धनु राशि
ग्रह फल
सूर्य पाप अपयश
चंद्र नृप भय
मंगल रोग भय
बुध रोग भय
गुरु सम्मान धन वृद्धि
शुक्र वस्त्राभूषण लाभ
शनि पाप धन क्षय
राहु। अति दुःख
केतु वित्त नाश

मकर राशि
ग्रह फल
सूर्य सौख्यं कार्य सिद्धि
चंद्र सुख
मंगल। शुभ
बुध सुभोग
गुरु वित्त नाश
शुक्र दुख
शनि। वैमनस्य अशांति
राहु वैर
केतु भय

कुंभ राशि
ग्रह फल
सूर्य वित्त प्राप्ति
चंद्र लाभ
मंगल अत्यन्त लाभ
बुध शुभ
गुरु। सौख्यं
शुक्र धनागम
शनि। सुख धन लाभ
राहु वित्त प्राप्ति
केतु अर्थ लाभ

मीन राशि
ग्रह फल
सूर्य। द्रव्य नाश
चंद्र रोग धन नाश
मंगल। रोग शोक अर्थ नाश
बुध धन हानि
गुरु पीड़ा
शुक्र धनागम
शनि क्लेश
राहु पीड़ा
केतु वैर

Uttarakhand