धर्म-कर्म:- महासाधना पर्व- अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जयंती पर

धर्म-कर्म:- महासाधना पर्व- अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जयंती पर

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रिपोर्ट- नैनीताल
जानिए पूजन विधि- ज्योतिषाचार्य डॉ मंजू जोशी
नैनीताल- *तुल्यं युगसहस्रेण त्रेतादौ सम्प्रकीर्तितम्।*
*अक्षया सा तिथिस्तस्मात् त्रेतायुगमुखी शुभा॥*
19 अप्रैल 2026, रविवार को भारतीय कालगणना का वह स्वर्णिम दिन है, जिसे हम ‘अक्षय तृतीया’ के रूप में पूजते हैं। यह मात्र एक तिथि नहीं, अपितु ब्रह्मांड की अक्षय ऊर्जा से एकाकार होने का महापर्व है।
*तिथि एवं उदया तिथि विवेचन*
सनातन धर्म में सभी पर्व को मनाने के लिए भिन्न-भिन्न नियम सुनिश्चित किए गए हैं अक्षय तृतीया के उपलक्ष में धर्म शास्त्रों में कहा गया है–
*अक्षय्यतृतीया च रोहिणीयुक्ता विशेषेण फलप्रदा।*
*सा च मध्याह्नव्यापिनी ग्राह्या दानहोमजपादिषु॥*
*वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया जब दिवाकाल में व्याप्त हो, तब वह समस्त मांगलिक कार्यों के लिए ‘सिद्ध मुहूर्त’ बन जाती है।* अतः निसंकोच होकर 19 अप्रैल 2026 दिन रविवार को अक्षय तृतीया पर्व हर्षोल्लास से मनाएं।
अक्षय तृतीया पर अनेक शुभ योगों का निर्माण हो रहा है–आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सूर्य व चंद्रमा क्रमशः अपनी उच्च राशि में विराजमान होकर शुभ फल प्रदान करेंगे।
*मुहूर्त–*
तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, प्रातः 10:52 से 20 अप्रैल 2026, प्रातः 07:30 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त 11:54 से 12:46 तक।
निर्णय: चूंकि 19 अप्रैल को मध्याह्न काल और प्रदोष काल दोनों में ही तृतीया तिथि विद्यमान है, अतः 19 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती मनाना पूर्णतः शास्त्रसम्मत और श्रेयस्कर है।
*भगवान परशुराम जयंती:–*
शस्त्र और शास्त्र का संगम
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ही न्याय के ध्वजवाहक, भगवान श्री हरि विष्णु जी के छठे कलावतार अक्षय पुरुष परशुराम जी का अवतरण हुआ था। महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के तेज से उत्पन्न भगवान परशुराम हमें अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना की प्रेरणा देते हैं। इस दिन उनकी पूजा से साहस और बौद्धिक प्रखरता की प्राप्ति होती है।
*✨ आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय वैशिष्ट्य*
स्वयंसिद्ध मुहूर्त: इस दिन सूर्य (मेष) और चंद्रमा (वृषभ) अपनी उच्च राशियों में प्रतिष्ठित होकर ‘अक्षय फल’ की वर्षा करते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन से त्रेतायुग का सूत्रपात हुआ था।
अक्षय पुण्य: ‘न क्षय इति अक्षय’ — इस दिन किया गया दान, जप, तप और स्वाध्याय कभी क्षीण नहीं होता।
साधना विधि एवं मंत्र शुद्धि
शुद्ध अन्तःकरण से ब्रह्म मुहूर्त में तीर्थ आवाहन कर स्नान करें:
*गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।*
*नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥*
*पूजन विधि:–*
ब्रह्ममुहूर्त में जागकर, घर, मंदिर को स्वच्छ कर, स्नानादि के उपरांत पूजा गृह में दीपक प्रज्वलित करें, पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का षोडशोपचार पूजन करें। उन्हें चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें। खीर, मिष्ठान का भोग लगाएं, बाईं और जल पात्र रखें, घी की बत्ती से आरती करें। सभी की मंगलकामना हेतु कामना करें।
*दान*
अक्षय तृतीया तिथि पर पितरों के निमित्त सामर्थ्यानुसार कच्चा भोजन, वस्त्र दान करें।
इसके अतिरिक्त जरूरतमंदों जलपूर्ण कुंभ (कलश), अनाज, पंखा और मौसमी फलों का दान करने से परिवार में अक्षय तृप्ति बनी रहती है।

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