
रिपोर्ट- नैनीताल
नैनीताल- उत्तराखंड सहित संपूर्ण भारत में भद्रारहित शुभ योगों के बीच मनाया जाएगा सावन पूर्णिमा का पवित्र पर्व; जानिए उपाकर्म और राखी बांधने का सटीक समय।
“आयुषे त्वं जीवनाय त्वं, वर्धनाय त्वं पारिप्लवाय त्वं।
“यथा त्वं गुह्येन रक्षितः, तथा त्वां रक्षतु सर्वदा।।
सनातन परंपरा के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहन के स्नेह,प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन तथा सांस्कृतिक मूल ‘श्रावणी उपाकर्म’ अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
विशेष रूप से देवभूमि उत्तराखंड में इस दिन जनेऊ परिवर्तन, ऋषि तर्पण तथा नांदी श्राद्ध का विशेष विधान होता है।
इस वर्ष श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन पर्व 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा।
:—-भद्रा का साया नहीं रहेगा:—
इस वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर सबसे विशेष बात यह है कि भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। भद्रा 27 अगस्त प्रातः 09:10 से रात्रि 09:34 पर समाप्त हो जाएगी। अतः 28 अगस्त को पूर्ण शुद्ध मुहूर्त में रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म पर्व मनाया जाएगा।रक्षाबंधन पर्व पूर्ण रूप से भद्रा मुक्त रहेगा। राहु काल को त्यागकर, निसंकोच होकर संपूर्ण दिवस श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन का उत्सव मनाएं।
:—-आंशिक चंद्र ग्रहण: संशय दूर करें:—-
28 अगस्त 2026 को पढ़ने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए भारत में इसका कोई भी धार्मिक महत्व नहीं होगा तथा ना ही कोई सूतक काल लगेगा। यह ग्रहण केवल अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में दिखाई देगा।
आप सभी निसंकोच होकर संपूर्ण दिवस श्रावणी उपाकर्म एवं रक्षाबंधन पर्व मना सकते हैं।
:—-शुभ मुहूर्त, उपाकर्म और राहुकाल समय 28 अगस्त:—
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) प्रातः 09:08 से 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) प्रातः 09:48 तक।
(पूर्णिमा उपवास 27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार को रहेगा।)
:—-श्रावणी उपाकर्म (जनेऊ परिवर्तन व तर्पण) मुहूर्त:—-
प्रातः सूर्योदय के साथ ही श्रावणी उपाकर्म का शुभ मुहूर्त प्रारंभ होगा।
समय: प्रातः 05:57 से 09:48 तक।
(इसी अवधि में हेमाद्रि स्नान, यज्ञोपवीत धारण, पितृ-ऋषि तर्पण एवं नांदी श्राद्ध भी किया जाएगा।)
:—-नांदी श्राद्ध हेतु उत्तम समय: प्रातः 05:57 से 08:30 तक:—-
यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करते समय का मंत्र:
“यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
“आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।
:—-रक्षाबंधन (राखी बांधने) का शुभ समय रहेग:—-
प्रथम सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा–प्रातः 05:57 से 09:48 तक।
अपराह्न शुभ चौघड़िया मुहूर्त 12:22 से अपराह्न 01:58 तक।
सायंकालीन मुहूर्त 05:11 से 06:47 बजे तक रहेगा।
इसके पश्चात भी राहुकाल त्याग कर संपूर्ण दिवस रक्षाबंधन पर्व मनाया जा सकता है।
:—-राहुकाल समय:—-
28 अगस्त 2026 प्रातः 10:46 से अपराह्न 12:22 तक रहेगा।
राहुकाल के समय रक्षा सूत्र बांधने अथवा कोई भी शुभ, मंगल कार्य करने से बचना चाहिए।
:—-राखी पर्व की पौराणिक कथा:—
भविष्य पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में देवासुर संग्राम के समय देवता पराजित हो रहे थे। व्यथित होकर इंद्र देव, देव गुरु बृहस्पति के पास गए,वहां उपस्थित इंद्र की भार्या इंद्राणी (शुचि) ने कहा–
हे स्वामी कल श्रावण शुक्ल पूर्णिमा है। मैं विधानपूर्वक रक्षासूत्र तैयार करूंगी, उसे आप स्वस्तिवाचन पूर्वक ब्राह्मणों से बंधवा लीजिएगा।
अगले दिन श्रावण पूर्णिमा तिथि पर इंद्रदेव ने इंद्राणी द्वारा बनाए रक्षाविधान का बृहस्पति जी से रक्षाबंधन कराया, जिसके प्रभाव से देवराज इंद्र की विजय हुई। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा सूत्र बांधने की प्रथा चली आ रही है।
:—-रक्षा सूत्र बांधने की विधि व मंत्र:—-
प्रथम रक्षा सूत्र भगवान श्री कृष्ण को अर्पित करें।
राखी बांधते समय भाई को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। मस्तक पर तिलक लगाएं। पांच घी बत्ती जलाकर आरती करें तथा ईश्वर से भाई के सुख एवं दीर्घ जीवन की प्रार्थना करें। तत्पश्चात भाई के दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधते समय इस मंत्र का पाठ करें:–
“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
“तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल।।
सनातन परंपरा में मूल रक्षा विधान तो कलावा (रक्षा सूत्र) का ही है। इसलिए सर्वप्रथम शास्त्रीय विधि से संकल्पित रक्षा सूत्र भाई की कलाई पर धारण कराएं, तत्पश्चात भ्रातृ-स्नेह के प्रतीक स्वरूप अपनी इच्छानुसार अन्य सुंदर राखी बांध सकते हैं।


