चुनौतियों से जूझता हिमालय

चुनौतियों से जूझता हिमालय

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रिपोर्ट- नैनीताल
नैनीताल- हिमालयी क्षेत्रों में हिमनद झील के बिस्फोट से पैदा होने वाले बाढ़ व जानमाल के खतरों से निपटने के लिए नैनीताल में तमाम राज्यों के प्रशानिक अधिकारियों,गांवों के जनप्रतिनिधियों व विशेषज्ञों का दो दिवसीय मंथन शुरू हो गया है।
डॉ आर. एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी नैनीताल में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस मंथन कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण लगातार पिघलते ग्लेशियरों से बनने वाली झीलें आने वाले समय में केदारनाथ,सिक्किम व नेपाल जैसी बड़ी आपदाओं की वजह न बनें इसके लिए एक ठोस फ्रेमवर्क और नीति विशेष पर फोकस किया जा रहा है।

एक्सपर्ट मानते हैं कि ग्लेशियरों की प्रॉपर निगरानी करने के साथ-साथ जन मानस को जागरूक करना भी जरूरी है जिससे कि आपदा आने की स्थिति में राहत बचाव किया जा सके।
एक्सपर्ट बताते हैं कि आज हिमालय के सामने 3 सबसे बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं पहला इकोलॉजिकल दूसरा आपदा और तीसरा मौसम बदलाव जब ये तीनों एक साथ मिल जाते हैं तो आपदा बहुगणित हो जाती है इसलिए विकास के मॉडल पर विशेष ध्यान देने की भी जरूरत है।
जब तक विकास का मॉडल छोटा और टिकाऊ नहीं बनायेंगे तब तक हम आपदाओं को नियंत्रित नहीं कर सकेंगे।
हालांकि सरकार का दावा है कि आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से सभी तैयारियों को मूर्त रुप दिया गया है और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं जिससे कि आपदा से उत्तराखंड को मुक्त किया जा सके।

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