काफल पाको,मैल नी चाखो

काफल पाको,मैल नी चाखो

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रिपोर्ट- नैनीताल
नैनीताल- “काफल पाको मैल नी चाखो” वैसे तो इस वाक्य के साथ उत्तराखंड की एक मर्मस्पर्शी लोकगाथा जुड़ी है लेकिन इन दिनों इसका प्रयोग काफल की कीमत को लेकर किया जा रहा है।
लाल-लाल रसीला गुणों का खजाना पहाड़ी फल “काफल” बाजार में आ चुका है लेकिन अभी ये 500 रुपये किलो बिक रहा है जो आम लोगों की पहुंच से बहुत दूर है।

हालाकि काफल के शौकीन और पर्यटक रसीले काफलों का खूब लुत्फ उठा रहे है।
आपको बता दें काफल एक विशुद्ध पहाड़ी फल है जिसका लोग बेसब्री से इंतजार करते है आमतौर पर ये फल मार्च लास्ट से पकना शुरू होता है लेकिन आबोहवा में बदलाव के कारण अब ये समय से पहले ही पकने लगा है लेकिन इससे इसके रंग,स्वाद और गुणों पर कोई असर नही पड़ता आज भी काफल के शौकीन इसका इंतजार करते है कि कब काफल आये और कब वो इसका रस्वादन करें।
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काफल कारोबारी राजेन्द्र पाल बताते है कि काफल जंगलों में पकने शुरू हो गये लेकिन अभी शुरुआत है इसलिये ये महंगा बिक रहा है हालाकि हर वर्ष जंगलों में आग लगने के कारण भी काफल की पैदावार प्रभावित हुई है और जो काफल बचे भी है बंदरो से उनको बचाकर लाना थोड़ा मुश्किल जरूर है।
लेकिन काफलों के शौकीन चिंतित ना हो क्योंकि आने वाले 3 महिने काफलों के है और ऐसी उम्मीद है कि तब आम इंसान भी इसको चख पायेगा।

उत्तराखंड